विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में वस्त्र-विधान — प्रकार, सामग्री और नियम:
कुलार्णव तंत्र (15.62) — वस्त्र का सिद्धांत
शुद्धवस्त्रधरः साधकः सिद्धिं प्राप्नोति निश्चितम्।
मलिनाम्बरधारी तु साधनं व्यर्थयेत् ध्रुवम्।।'
— शुद्ध वस्त्र पहनने वाला साधक निश्चित सिद्धि पाता है। मैले वस्त्र वाले की साधना व्यर्थ हो जाती है।
वस्त्र की सामग्री — श्रेष्ठता क्रम
1रेशम (सिल्क) — सर्वोत्तम
महानिर्वाण तंत्र: 'कौशेयं वस्त्रमुत्तमम्।' — रेशम सर्वोत्तम वस्त्र है। रेशम विद्युत-कुचालक है — शरीर की ऊर्जा बाहर नहीं जाती, संचित रहती है।
2सूती (Cotton) — मध्यम
सूती वस्त्र — शुद्ध, ताजे धुले — स्वीकार्य। विशेषतः सात्विक-तांत्रिक साधना में।
3ऊनी (Woolen) — विशेष परिस्थितियों में
आसन के लिए ऊनी कम्बल श्रेष्ठ — परंतु वस्त्र के रूप में शीत-काल साधना में।
4वर्जित सामग्री
- ▸चर्म-वस्त्र (leather) — तांत्रिक साधना में वर्जित (जीव-हत्या-दोष)
- ▸नायलॉन/पॉलिएस्टर — ऊर्जा-अवरोधक
- ▸दूसरे के पहने वस्त्र — वर्जित
वस्त्र का प्रकार — देवता-अनुसार
पुरुष साधक
- ▸धोती — सर्वोत्तम (अनसिला वस्त्र — ऊर्जा प्रवाह अबाधित)
- ▸उत्तरीय (ऊपर का वस्त्र) — देवता के रंग में
- ▸उच्च साधना: पूर्णतः अनसिला (अखण्ड) वस्त्र
महिला साधक
- ▸साड़ी — देवता के रंग में
- ▸शारदातिलक: महिला साधक के लिए साड़ी आदर्श — ऊर्जा-प्रवाह के लिए अनुकूल
विशेष तांत्रिक वेश
- ▸श्मशान-साधना: काले वस्त्र या न्यूनतम वस्त्र (परंपरा-भेद से)
- ▸श्रीविद्या: लाल रेशमी वस्त्र — सम्पूर्ण लाल
- ▸बगलामुखी: पीले रेशमी वस्त्र — सम्पूर्ण पीले
वस्त्र-संबंधी नियम
- 1प्रत्येक साधना में ताजे धुले वस्त्र
- 2साधना-वस्त्र केवल साधना के लिए — दैनिक उपयोग नहीं
- 3वस्त्र को साधना-स्थान पर ही रखें
- 4सिले वस्त्र का धागा शुद्ध सूत का हो
- 5कुलार्णव: 'वस्त्रं देवतास्वरूपम्।' — वस्त्र देवता-स्वरूप है — इसका अपमान न करें।