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तंत्र साधना📜 हठ योग प्रदीपिका, शोध: DhyanSamadhi, BhaktiSatsang — नाड़ी+कुंडलिनी1 मिनट पठन

तंत्र में नाड़ी शोधन प्राणायाम का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र नींव। इड़ा-पिंगला संतुलन → सुषुम्ना खुले → कुंडलिनी मार्ग। 72,000 नाड़ी शुद्ध। बिना = कुंडलिनी कठिन/खतरनाक। बाएं→दाएं→दाएं→बाएं = 1 चक्र। जप पूर्व।

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विस्तृत उत्तर

नाड़ी शोधन (अनुलोम-विलोम) = तंत्र साधना की नींव:

महत्व (DhyanSamadhi/BhaktiSatsang based)

  1. 1इड़ा-पिंगला संतुलन: बाईं (चंद्र/शीतल) + दाहिनी (सूर्य/ऊष्ण) → संतुलित → सुषुम्ना खुले → कुंडलिनी मार्ग।
  2. 272,000 नाड़ी शुद्ध: शरीर में 72,000 नाड़ियां — प्राणायाम → शुद्ध → ऊर्जा निर्बाध।
  3. 3कुंडलिनी तैयारी: बिना नाड़ी शोधन = कुंडलिनी जागरण कठिन/खतरनाक।
  4. 4मन शांत: श्वास नियंत्रित = विचार नियंत्रित = ध्यान/जप गहन।

विधि: बाएं से अंदर → दाएं से बाहर → दाएं से अंदर → बाएं से बाहर = 1 चक्र। 10-20 चक्र। जप पूर्व।

हठ योग प्रदीपिका: नाड़ी शोधन = हठ योग का प्रथम अभ्यास।

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शास्त्रीय स्रोत
हठ योग प्रदीपिका, शोध: DhyanSamadhi, BhaktiSatsang — नाड़ी+कुंडलिनी
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