विस्तृत उत्तर
नाड़ी शोधन (अनुलोम-विलोम) = तंत्र साधना की नींव:
महत्व (DhyanSamadhi/BhaktiSatsang based)
- 1इड़ा-पिंगला संतुलन: बाईं (चंद्र/शीतल) + दाहिनी (सूर्य/ऊष्ण) → संतुलित → सुषुम्ना खुले → कुंडलिनी मार्ग।
- 272,000 नाड़ी शुद्ध: शरीर में 72,000 नाड़ियां — प्राणायाम → शुद्ध → ऊर्जा निर्बाध।
- 3कुंडलिनी तैयारी: बिना नाड़ी शोधन = कुंडलिनी जागरण कठिन/खतरनाक।
- 4मन शांत: श्वास नियंत्रित = विचार नियंत्रित = ध्यान/जप गहन।
विधि: बाएं से अंदर → दाएं से बाहर → दाएं से अंदर → बाएं से बाहर = 1 चक्र। 10-20 चक्र। जप पूर्व।
हठ योग प्रदीपिका: नाड़ी शोधन = हठ योग का प्रथम अभ्यास।