विस्तृत उत्तर
काली तंत्र साधना — सम्पूर्ण विधि और आवश्यक सावधानियाँ:
कालीकुल तंत्र — काली साधना का स्वरूप
काली तंत्रस्य मूलं च सर्वदेवीषु श्रेष्ठिका।
कालीसाधनमुख्यं हि तंत्रे सर्वोत्तमं मतम्।।'
— काली तंत्र का मूल है। सभी देवियों में श्रेष्ठ। काली-साधना तंत्र में सर्वोत्तम मानी गई है।
काली-साधना के दो मार्ग
1दक्षिणाचार (सामान्य साधकों के लिए)
- ▸मानसिक पञ्चमकार (प्रतीकात्मक)
- ▸लाल पुष्प, नारियल, खीर भोग
- ▸रात्रि जप — अमावस्या/कालरात्रि
- ▸सुरक्षित और गुरु-मार्गदर्शन में करणीय
2वामाचार (उन्नत — केवल दीक्षित)
- ▸पञ्चमकार (पाँच 'म' — मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन)
- ▸महानिर्वाण तंत्र: यह 'वीरमार्ग' है — पशु-भाव के साधकों के लिए वर्जित
- ▸बिना गुरु-दीक्षा के वामाचार = स्वयं को हानि
काली-साधना की सामान्य विधि (दक्षिणाचार)
3काल
- ▸अमावस्या रात्रि (12 बजे) — सर्वोत्तम
- ▸कालरात्रि (नवरात्रि की सातवीं रात्रि)
- ▸दीपावली की रात्रि — महाकाली-पूजा
4स्थान
एकांत कक्ष (सामान्य), श्मशान (उच्च-स्तरीय — गुरु के साथ)
3. वस्त्र: काले या लाल
5मंत्र (मुख्य)
दशाक्षरी: 'ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके स्वाहा'
6ध्यान
श्यामवर्णा, दश-भुजा, मुण्डमाला, खड्ग-खप्पर, दिगम्बरा, कपाल-माला-धारिणी काली का ध्यान।
7भोग
लाल गुड़हल, नारियल, लाल मिठाई। वामाचार में अलग — गुरु-निर्देशित।
8पुरश्चरण
9 लाख जप (9 अक्षरी मंत्र के लिए)
9संरक्षण-मंत्र
काली-साधना से पूर्व महामृत्युंजय की 3 माला — रक्षा-कवच के लिए।
चेतावनी
काली उग्र देवता नहीं — वे करुणामयी माँ हैं। परंतु उनकी ऊर्जा तीव्र है। बिना दीक्षा और गुरु-मार्गदर्शन के न करें।
