विस्तृत उत्तर
भैरव तंत्र साधना — काशी के क्षेत्रपाल की उपासना:
भैरव तंत्र — भैरव का स्वरूप
भैरव = शिव का उग्र रूप। 64 भैरव और 8 'अष्टभैरव' — तंत्र में वर्णित। मुख्य रूप:
- ▸बटुकभैरव — सौम्य, संकट-निवारक, सुलभ
- ▸कालभैरव — काशी के क्षेत्रपाल, उग्र, सिद्धि-दाता
- ▸स्वच्छन्दभैरव — कश्मीर शैव परंपरा में सर्वोच्च
भैरव-साधना की विधि
1काल
- ▸कालाष्टमी (कृष्ण-पक्ष अष्टमी) — प्रतिमास
- ▸मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी (काल-भैरवाष्टमी) — वर्ष में सर्वोत्तम
- ▸अर्धरात्रि (12 बजे) — नित्य जप के लिए
- ▸रविवार — भैरव का वार
2स्थान
काशीखंड: काशी में — काल-भैरव मंदिर के निकट — सर्वोच्च। अन्यत्र — शिव मंदिर या एकांत।
3वस्त्र और माला
- ▸काले या गेरुए वस्त्र
- ▸रुद्राक्ष माला
4मंत्र
- ▸बटुकभैरव: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।' — संकट-निवारण
- ▸कालभैरव: 'ॐ हूं भैरवाय नमः' — सामान्य साधना
- ▸षोडशाक्षरी भैरव मंत्र — गुरु-दत्त
5ध्यान
कालभैरव — कृष्णवर्ण, त्रिनेत्र, जटाजूट, डमरू, त्रिशूल, खप्पर, और श्वान-वाहन — का ध्यान।
6भोग
भुने उड़द, तिल के लड्डू, सरसों तेल का दीपक, पान-सुपारी।
7पुरश्चरण
ॐ हूं भैरवाय नमः' — 6 लाख जप।
भैरव-सिद्धि का फल (रुद्रयामल)
- ▸क्षेत्र-रक्षण — साधक के क्षेत्र में नकारात्मक शक्तियाँ नहीं
- ▸शत्रु-निवारण — शत्रु का प्रभाव नष्ट
- ▸अकाल-मृत्यु से रक्षा
- ▸न्याय में सफलता
भैरव और शिव-भक्ति
भैरव की उपासना 'शिव की शरण' का एक रूप है। बटुकभैरव-साधना — सात्विक भक्त के लिए सुरक्षित और फलदायी।

