विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के पाँच प्रमुख नियम — शास्त्र-निर्देशित:
महानिर्वाण तंत्र — नियमों का श्लोक
गुरुभक्तिः शुचित्वं च ब्रह्मचर्यं तथैव च।
गोपनं मंत्रसाधनं त्यागश्च पञ्चकं स्मृतम्।।'
— गुरु-भक्ति, शुचित्व, ब्रह्मचर्य, मंत्र-गोपन, और त्याग — ये पाँच नियम हैं।
पाँचों नियमों का विस्तृत विवेचन
1गुरु-भक्ति (सर्वप्रमुख)
कुलार्णव (15.60): 'गुरौ भक्तिः परा कार्या।' — गुरु में परम भक्ति — यह तंत्र का मूल नियम है। गुरु-आज्ञा का पालन = सिद्धि का सबसे छोटा मार्ग।
गुरु-भक्ति में सम्मिलित: गुरु की प्रत्येक आज्ञा का पालन, गुरु-निंदा का त्याग, गुरु-पूजा नित्य।
2शुचित्व (शारीरिक और मानसिक शुद्धि)
तंत्रसार: शुचित्व = केवल शारीरिक शुद्धि नहीं — मन की शुद्धि भी।
- ▸बाह्य शुचित्व: नित्य स्नान, शुद्ध वस्त्र, साधना-स्थल की स्वच्छता
- ▸आंतरिक शुचित्व: क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, और असत्य — इनसे दूरी
शारदातिलक: 'अंतःशुद्धिर्बहिःशुद्धिः उभयं शुचिता मता।'
3ब्रह्मचर्य
रुद्रयामल तंत्र: तंत्र-साधना काल में ब्रह्मचर्य अनिवार्य है — कम से कम साधना-अवधि में।
ब्रह्मचर्य = केवल यौन-संयम नहीं — मन, वचन, कर्म — तीनों से। इंद्रिय-संयम से ओज बढ़ता है — ओज ही तांत्रिक शक्ति का आधार है।
4मंत्र-गोपन (गुप्तता)
कुलार्णव: 'गोप्यो मंत्राः साधनं गोप्यम्।' — मंत्र और साधना — दोनों गुप्त रखें।
गोपन में सम्मिलित:
- ▸अपना बीज मंत्र किसी को न बताएं
- ▸साधना-स्थान, काल, और विधि — गुप्त
- ▸सिद्धि के अनुभव — गुप्त
मंत्र बताने से उसकी शक्ति का ह्रास होता है।
5त्याग (वैराग्य)
महानिर्वाण तंत्र: तंत्र-साधना में 'त्याग' = संसारिक भोगों की लालसा का क्रमशः त्याग। यह एकाएक सन्यास नहीं — धीरे-धीरे विरागत्व आना।
अतिरिक्त तांत्रिक नियम (शास्त्र-निर्देशित)
- ▸नित्यता — एक दिन भी साधना न छूटे
- ▸समय-पालन — नित्य एक ही समय पर साधना
- ▸आहार-संयम — सात्विक आहार
- ▸मौन — जप-काल में पूर्ण मौन