विस्तृत उत्तर
भगवान शिव का अघोर स्वरूप (दक्षिण मुख) अत्यंत भयंकर और पापों तथा शत्रुओं का नाश करने वाला है। अघोर मंत्र का उपयोग केवल तब किया जाता है जब कोई शत्रु बिना कारण पीड़ा दे रहा हो और उसके कारण जीवन संकट में हो। इसका उद्देश्य शत्रु को मारना नहीं, बल्कि उसकी बुद्धि को 'शांत' या 'स्तंभित' (रोक देना) करना है।
शत्रु को शांत करने वाला अघोर मंत्र है—'ॐ अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः। सर्वतः शर्वः सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥' जब शत्रु का प्रहार बहुत तीव्र हो, तो दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, रुद्राक्ष की माला से भगवान शिव के रौद्र रूप का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जप किया जाता है। इसकी ऊर्जा शत्रु के मन में अज्ञात भय पैदा कर देती है और वह स्वतः ही शत्रुता भूलकर शांत हो जाता है।

