विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में पुष्प-विधान — देवता-अनुसार और तांत्रिक परंपरा-अनुसार:
शारदातिलक तंत्र — पुष्प का महत्व
पुष्पं देवताप्रीतये साधनां शक्तिवर्धनम्।
तंत्रे पुष्पं विशेषेण देवतानुगुणं दद्यात्।।'
— पुष्प देवता की प्रीति और साधना की शक्ति-वर्धन के लिए। तंत्र में विशेष रूप से देवता-अनुकूल पुष्प दें।
तांत्रिक देवताओं का पुष्प-विधान
1महाकाली / उग्र शक्ति
कालीकुल तंत्र:
- ▸जपापुष्प (लाल गुड़हल) — काली का सर्वप्रिय पुष्प
- ▸लाल कनेर (करवीर) — शक्ति-साधना में
- ▸रक्त-कमल — उपलब्ध हो तो श्रेष्ठ
- ▸वर्जित: सफेद पुष्प
2भैरव / भैरवी
भैरव तंत्र:
- ▸नीले कनेर (नीला करवीर)
- ▸अपराजिता (नीला फूल)
- ▸धतूरा-पुष्प — शास्त्रोक्त (परंतु विषैला — सावधानी से)
- ▸लाल पुष्प — सामान्यतः
3त्रिपुरसुंदरी / ललिता / श्री विद्या
शारदातिलक:
- ▸कमल (लाल या सफेद) — सर्वश्रेष्ठ
- ▸मल्लिका (मोगरा/जाती) — सुगंधित पुष्प
- ▸पाटल (गुलाब-कमल) — त्रिपुरसुंदरी को प्रिय
- ▸कुंद — शुद्ध सफेद पुष्प
4तारा
तारा तंत्र:
- ▸नीलकमल — श्रेष्ठ
- ▸अपराजिता — सुलभ विकल्प
- ▸नीले पुष्प — सामान्यतः
5छिन्नमस्ता
- ▸लाल गुड़हल, लाल कनेर
- ▸उग्र साधना में — रक्त-वर्णी पुष्प
6बगलामुखी
- ▸पीले पुष्प — विशेषतः पीली गेंदा और पीला कनेर
- ▸महानिर्वाण: बगलामुखी पूर्णतः पीली साधना — पीले वस्त्र, पीला भोग, पीले पुष्प
7धूमावती
- ▸सफेद या धुएँ-रंग के पुष्प
- ▸कुश-पुष्प (यदि उपलब्ध)
सामान्य तांत्रिक पुष्प-नियम (कुलार्णव)
- ▸वर्जित: सूखे, कीड़े लगे, अधखिले, या दूसरे को दिए पुष्प
- ▸श्रेष्ठ: स्वयं तोड़े, ताजे, पूर्ण खिले, एवं सुगंधित पुष्प
- ▸संख्या: 5, 7, 11, 21, 108 — विषम या शास्त्र-निर्धारित
- ▸समर्पण: 'ॐ [देवनाम] पुष्पं समर्पयामि' — मंत्र सहित
- ▸बिना पुष्प के: अक्षत (अखण्ड चावल) पुष्प-स्थान पर स्वीकार्य