विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना में रंग का विधान — प्रत्येक देवता और साधना-प्रकार के अनुसार:
महानिर्वाण तंत्र — रंग का सिद्धांत
वर्णो देवतानुरूपः साधकस्य विधीयते।
साधनाङ्गं वस्त्रवर्णः सिद्धिदो भवति ध्रुवम्।।'
— देवता के अनुरूप वस्त्र-वर्ण साधक के लिए विहित है। वस्त्र-वर्ण साधना का अंग है और सिद्धि देने वाला है।
देवता-अनुसार तांत्रिक रंग-विधान
1महाकाली / उग्र काली
- ▸लाल — सर्वोत्तम (शक्ति, रक्त, तेज का प्रतीक)
- ▸काला — श्मशान-साधना और उग्र तांत्रिक साधना में
- ▸कालीकुल: 'काल्यै रक्तवस्त्रं श्रेष्ठम्।'
2भैरव / कालभैरव
- ▸काला — कालभैरव का मूल वर्ण
- ▸गेरुआ/भगवा — बटुकभैरव साधना में
- ▸काले वस्त्र = रात्रि-साधना में रक्षा-कवच
3त्रिपुरसुंदरी / ललिता / श्रीविद्या
- ▸लाल — त्रिपुरसुंदरी का वर्ण
- ▸गुलाबी — सौम्य रूप की साधना में
- ▸शारदातिलक: श्रीविद्या में लाल वस्त्र, लाल आसन, लाल सब।
4तारा
- ▸नीला — तारा का मूल वर्ण
- ▸श्वेत — शांत रूप की साधना में
5बगलामुखी
- ▸पीला — अनिवार्य। बगलामुखी साधना में पीले के अलावा कोई रंग स्वीकार्य नहीं।
- ▸कुलार्णव: 'बगलायाः पीतवस्त्रं सर्वदा।'
6छिन्नमस्ता
- ▸लाल — उग्र शक्ति का प्रतीक
7धूमावती
- ▸सफेद या धुएँ-रंग (ग्रे) — विधवा-स्वरूप की देवी
8कमला (तांत्रिक लक्ष्मी)
- ▸पीला या सुनहरा — वैभव और समृद्धि का प्रतीक
9मातंगी
- ▸हरा — सरस्वती-अंश, प्रकृति का रंग
10भुवनेश्वरी
- ▸लाल या सुनहरा — ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री
सामान्य तांत्रिक नियम
- ▸साधना-काल में एक ही रंग के वस्त्र — भिन्न-रंग वर्जित
- ▸ताजे धुले वस्त्र — प्रत्येक साधना में
- ▸सिले हुए वस्त्र (stitched) — अनुमत। कुछ उच्च साधनाओं में अखण्ड (अनसिला) वस्त्र।