विस्तृत उत्तर
काल भैरव = काशी के कोतवाल (नगर रक्षक); शिव का उग्र रूप। काशी यात्रा = काल भैरव दर्शन अनिवार्य माना जाता है।
क्यों जरूरी: काशी = शिव नगरी; काल भैरव = नगर प्रमुख/कोतवाल; बिना कोतवाल अनुमति = काशी दर्शन अपूर्ण (मान्यता)। काल भैरव = पापों के न्यायाधीश; दर्शन = पाप स्वीकारोक्ति + क्षमा। अष्ट भैरव में प्रमुख।
विशेष: भैरव को मदिरा (शराब) अर्पित होती है — अत्यंत अनूठी परंपरा; अन्य मंदिरों में नहीं। मूर्ति के होंठों पर मदिरा = गायब (रहस्य)।
दर्शन: विश्वनाथ से ~1km। प्रातः दर्शन शुभ। कुत्ता = भैरव वाहन; मंदिर परिसर में कुत्ते = भैरव प्रतिनिधि।




