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विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय दृष्टि: पूजा में स्वच्छ, सात्विक वस्त्र (धुले हुए, सूती/रेशमी, सफेद/पीले/केसरिया) उत्तम। सिले वस्त्रों की तुलना में धोती/साड़ी = परंपरागत।
व्यावहारिक दृष्टि: जींस पहनकर पूजा = कोई शास्त्रीय निषेध नहीं। शास्त्रों में 'जींस' का उल्लेख नहीं (आधुनिक वस्त्र)। नियम = स्वच्छता + श्रद्धा।
महत्वपूर्ण
- ▸स्वच्छ जींस (गंदी/फटी नहीं) + शुद्ध मन = पूजा स्वीकार्य।
- ▸मंदिर जाते समय = संस्कृति/नियम अनुसार (कुछ मंदिर धोती/साड़ी अनिवार्य)।
- ▸घर पर पूजा = जींस में भी कर सकते हैं — भगवान वस्त्र नहीं, भाव देखते हैं।
गीता (9.26): भगवान भक्ति का भाव देखते हैं — वस्त्र, जाति, लिंग नहीं।
सबसे उत्तम: यदि संभव हो = धुले स्वच्छ भारतीय वस्त्र। न हो = स्वच्छ जींस > गंदी धोती।
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