नहीं — विवेक (बुद्धि) सबसे ऊपर।
ज्योतिष = मार्गदर्शन, नियति नहीं
- ▸ज्योतिष = ग्रहों की संभावित प्रवृत्ति बताता है — निश्चित भविष्य नहीं।
- ▸कर्म > ग्रह — गीता: कर्म प्रधान। ग्रह संकेत देते हैं, निर्णय आपका।
सावधानियाँ
- 1हर बात ज्योतिषी से न पूछें — अपनी बुद्धि + मेहनत = प्राथमिक।
- 2महँगे उपाय से बचें — सच्चा ज्योतिषी लूटता नहीं।
- 3भय पैदा करने वाले से बचें — 'पूजा न कराओगे तो मरोगे' = नकली।
- 4एक ज्योतिषी की बात = अंतिम सत्य नहीं — दूसरी राय लें।
- 5वैज्ञानिक दृष्टि: ज्योतिष = विज्ञान या अंधविश्वास — विवाद जारी।
संतुलित: ज्योतिष = सहायक मार्गदर्शन (GPS जैसा — रास्ता दिखाए, चलना आपको)। अंधविश्वास = खतरनाक। विवेक = सबसे बड़ा रत्न।