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पूजा विधि एवं नियम⏱ 2 मिनट पठन

घर में शंख रखने के नियम क्या हैं?

शंख को पूजाघर के ईशान कोण में, लाल-पीले वस्त्र पर रखें। बजाने और जल अर्पण के लिए अलग-अलग शंख रखें।

संक्षिप्त उत्तर

शंख को पूजाघर के ईशान कोण में, लाल-पीले वस्त्र पर रखें। बजाने और जल अर्पण के लिए अलग-अलग शंख रखें। दक्षिणावर्ती शंख केवल पूजा के लिए है। शिव पूजा में शंख न बजाएं, न उससे जल चढ़ाएं।

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विस्तृत उत्तर

शंख समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए चौदह रत्नों में से एक है और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी को यह अत्यंत प्रिय है। जिस घर में शंख होता है वहाँ माता लक्ष्मी का वास माना जाता है। घर में शंख रखने और उपयोग के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं।

शंख के प्रकार: मुख्यतः दो प्रकार के शंख होते हैं — दक्षिणावर्ती (दाईं ओर खुला) और वामावर्ती (बाईं ओर खुला)। दक्षिणावर्ती शंख को 'लक्ष्मी शंख' भी कहते हैं — यह अत्यंत शुभ और दुर्लभ होता है। इसे केवल पूजा में रखा जाता है, बजाया नहीं जाता। वामावर्ती शंख बजाने के लिए होता है।

रखने का नियम: शंख को हमेशा पूजाघर में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखें। एक ही स्थान पर दो शंख न रखें। शंख को लाल या पीले वस्त्र पर रखें, जमीन पर सीधे नहीं। जल से भरा शंख अलग रखें और बजाने वाला शंख अलग — दोनों का कार्य अलग-अलग है। शिव पूजा में शंख से न जल अर्पित करें और न शंख बजाएं। सूर्य देव को भी शंख से जल नहीं चढ़ाते। शंख को नियमित रूप से गंगाजल से शुद्ध करें और पवित्र रखें।

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