विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र में शौचालय की दिशा और स्थान का विशेष महत्व है क्योंकि यह अशुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है।
सर्वोत्तम दिशा
- ▸उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) — शौचालय के लिए सर्वोत्तम दिशा।
- ▸दक्षिण दिशा — दूसरा उत्तम विकल्प।
- ▸पश्चिम दिशा — स्वीकार्य विकल्प।
वर्जित दिशाएँ
- ▸ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — गंभीर वास्तु दोष। यह देव दिशा है, यहाँ शौचालय कभी नहीं बनाना चाहिए।
- ▸दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) — अग्नि तत्व का स्थान।
- ▸ब्रह्मस्थान (घर का मध्य) — कभी नहीं।
- ▸पूजा घर के बगल/ऊपर/नीचे — गंभीर दोष।
- ▸किचन के बगल — अग्नि-जल दोष।
अन्य नियम
- ▸शौचालय का दरवाज़ा सदैव बंद रखें।
- ▸शौचालय में बैठने का मुख उत्तर या दक्षिण की ओर हो।
- ▸शौचालय में रोशनी और वायु संचार पर्याप्त हो।
- ▸शौचालय से पानी का बहाव उत्तर या पूर्व की ओर हो।





