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वास्तु नियम📜 वास्तु शास्त्र1 मिनट पठन

वास्तु के अनुसार शौचालय किस दिशा में होना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

शौचालय उत्तर-पश्चिम (वायव्य), दक्षिण या पश्चिम में बनाएँ। ईशान कोण, अग्नि कोण और घर के मध्य में कभी नहीं। पूजा घर के बगल/ऊपर/नीचे भी वर्जित। दरवाज़ा सदैव बंद रखें।

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विस्तृत उत्तर

वास्तु शास्त्र में शौचालय की दिशा और स्थान का विशेष महत्व है क्योंकि यह अशुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है।

सर्वोत्तम दिशा

  • उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) — शौचालय के लिए सर्वोत्तम दिशा।
  • दक्षिण दिशा — दूसरा उत्तम विकल्प।
  • पश्चिम दिशा — स्वीकार्य विकल्प।

वर्जित दिशाएँ

  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — गंभीर वास्तु दोष। यह देव दिशा है, यहाँ शौचालय कभी नहीं बनाना चाहिए।
  • दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) — अग्नि तत्व का स्थान।
  • ब्रह्मस्थान (घर का मध्य) — कभी नहीं।
  • पूजा घर के बगल/ऊपर/नीचे — गंभीर दोष।
  • किचन के बगल — अग्नि-जल दोष।

अन्य नियम

  • शौचालय का दरवाज़ा सदैव बंद रखें।
  • शौचालय में बैठने का मुख उत्तर या दक्षिण की ओर हो।
  • शौचालय में रोशनी और वायु संचार पर्याप्त हो।
  • शौचालय से पानी का बहाव उत्तर या पूर्व की ओर हो।
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शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र
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