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वास्तु नियम📜 वास्तु शास्त्र2 मिनट पठन

किचन में चूल्हा किस दिशा में होना चाहिए वास्तु अनुसार?

संक्षिप्त उत्तर

चूल्हा दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) में रखें — सर्वोत्तम। खाना बनाने वाले का मुख पूर्व की ओर हो। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में चूल्हा कदापि नहीं — अग्नि-जल टकराव। चूल्हा और सिंक साथ न रखें।

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विस्तृत उत्तर

वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन और चूल्हे की दिशा का सीधा प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि पर पड़ता है।

चूल्हे की सर्वोत्तम दिशा

  • दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) — यह सर्वश्रेष्ठ दिशा है। अग्नि कोण अग्नि देवता का स्थान है, इसलिए चूल्हा यहाँ रखना सबसे शुभ है।
  • खाना बनाने वाले का मुख पूर्व की ओर हो — यह सर्वोत्तम।

वैकल्पिक दिशा

  • उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) — दूसरा विकल्प, यदि अग्नि कोण संभव न हो।

वर्जित दिशाएँ

  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — यहाँ चूल्हा कदापि नहीं। यह जल तत्व का स्थान है, अग्नि और जल का टकराव गंभीर वास्तु दोष है।
  • उत्तर दिशा — कुबेर का स्थान, यहाँ अग्नि अशुभ।

अन्य नियम

  • चूल्हा और सिंक (पानी) साथ-साथ न हो — अग्नि और जल तत्व का टकराव।
  • चूल्हा खिड़की के ठीक सामने न हो।
  • चूल्हा मुख्य दरवाज़े से दिखना नहीं चाहिए।
  • किचन का रंग नारंगी, हल्का लाल या पीला शुभ।
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शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र
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