विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन और चूल्हे की दिशा का सीधा प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि पर पड़ता है।
चूल्हे की सर्वोत्तम दिशा
- ▸दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) — यह सर्वश्रेष्ठ दिशा है। अग्नि कोण अग्नि देवता का स्थान है, इसलिए चूल्हा यहाँ रखना सबसे शुभ है।
- ▸खाना बनाने वाले का मुख पूर्व की ओर हो — यह सर्वोत्तम।
वैकल्पिक दिशा
- ▸उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) — दूसरा विकल्प, यदि अग्नि कोण संभव न हो।
वर्जित दिशाएँ
- ▸ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — यहाँ चूल्हा कदापि नहीं। यह जल तत्व का स्थान है, अग्नि और जल का टकराव गंभीर वास्तु दोष है।
- ▸उत्तर दिशा — कुबेर का स्थान, यहाँ अग्नि अशुभ।
अन्य नियम
- ▸चूल्हा और सिंक (पानी) साथ-साथ न हो — अग्नि और जल तत्व का टकराव।
- ▸चूल्हा खिड़की के ठीक सामने न हो।
- ▸चूल्हा मुख्य दरवाज़े से दिखना नहीं चाहिए।
- ▸किचन का रंग नारंगी, हल्का लाल या पीला शुभ।





