विस्तृत उत्तर
यज्ञशाला स्थान — वास्तु:
दिशा: आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) = अग्नि दिशा = यज्ञशाला सर्वोत्तम।
नियम
- 1गर्भगृह से अलग (अग्नि = गर्भगृह में नहीं)।
- 2खुला/अर्ध-खुला स्थान (धुआं निकास)।
- 3कुंड = केंद्र। बैठने = चारों ओर।
- 4पूर्व/उत्तर मुख = यजमान।
- 5जल स्रोत निकट (अभिषेक/शुद्धि)।
प्रकार: नियमित यज्ञशाला (बड़े मंदिर) या अस्थायी (उत्सव — तम्बू/मंडप)।
खरगोन (अमर उजाला): नवग्रह मंदिर = 9 मंजिला यज्ञशाला, प्रतिदिन 1 लाख आहुति!





