विस्तृत उत्तर
मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने दीपस्तंभ (Deep Stambha/Vilakku Madam) स्थापित करना भारतीय मंदिर वास्तुकला का अभिन्न अंग है।
दीपस्तंभ का स्वरूप
धातु (पीतल/काँसा/ताँबा) या पत्थर से बना ऊँचा स्तम्भ जिस पर अनेक दीपक (दिये) रखने के स्थान होते हैं। कुछ दीपस्तंभ 20-30 फीट ऊँचे होते हैं और उनमें सैकड़ों दीप जलाए जाते हैं।
लगाने के कारण
1अंधकार से प्रकाश (आध्यात्मिक)
तमसो मा ज्योतिर्गमय' — अंधकार से प्रकाश की ओर। दीपस्तंभ = अज्ञान (अंधकार) से ज्ञान (प्रकाश) की यात्रा का प्रतीक। मंदिर = ज्ञान का स्थान।
2देवता का स्वागत
आगम शास्त्र: दीपस्तंभ का प्रकाश देवता के स्वागत और सम्मान का प्रतीक है। जैसे किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के स्वागत में दीप जलाते हैं।
3नकारात्मक ऊर्जा निवारण
दीप का प्रकाश नकारात्मक शक्तियों (अंधकार, तम) को दूर भगाता है। मंदिर के प्रवेश पर दीपस्तंभ = मंदिर परिसर की ऊर्जा शुद्धि का प्रथम चरण।
4मार्गदर्शन
व्यावहारिक दृष्टि: प्राचीन काल में बिजली नहीं थी — दीपस्तंभ रात्रि में भक्तों को मंदिर का मार्ग दिखाता था।
5ध्वज स्तम्भ से भिन्नता
दीपस्तंभ ≠ ध्वज स्तम्भ। ध्वज स्तम्भ = देवता का ध्वज (पताका) — सम्प्रदाय/देवता की पहचान। दीपस्तंभ = प्रकाश स्तम्भ — ज्ञान और स्वागत। दोनों प्रायः मंदिर प्रवेश के पास, परंतु कार्य भिन्न।
6विशेष अवसर
उत्सवों (कार्तिक पूर्णिमा, दीपावली, नवरात्रि) में दीपस्तंभ पर सैकड़ों दीप जलाए जाते हैं — अत्यन्त भव्य दृश्य। केरल और तमिलनाडु मंदिरों में यह परम्परा विशेष प्रचलित।
7पंचतत्व सम्बंध
मंदिर में पंचतत्व = पृथ्वी (भूमि), जल (कुंड), अग्नि (दीपस्तंभ), वायु (ध्वज), आकाश (शिखर)। दीपस्तंभ = अग्नि तत्व का प्रतिनिधि।





