विस्तृत उत्तर
मंदिर निर्माण वास्तु — मुख्य नियम:
- 1स्थान: ऊंचा भूमि, जल स्रोत निकट, शुभ वृक्ष। श्मशान/अशुद्ध भूमि वर्जित।
- 2दिशा: गर्भगृह = पश्चिम/दक्षिण। प्रवेश = पूर्व/उत्तर (सर्वोत्तम)।
- 3वास्तु पुरुष मंडल: 64/81 पद (खाने) — ब्रह्मस्थान (केंद्र) = गर्भगृह।
- 4अनुपात: ऊंचाई:चौड़ाई = शास्त्रीय अनुपात। शिखर = गर्भगृह ऊपर।
- 5सामग्री: पत्थर (ग्रेनाइट/बलुआ) = सर्वोत्तम। ईंट/लकड़ी = भी।
- 6गर्भगृह: केंद्र, 3 तरफ बंद, 1 द्वार, अंधेरा।
- 7मंडप: सभा/नृत्य/भोग = अलग-अलग।
- 8परिक्रमा पथ: गर्भगृह चारों ओर।
- 9ध्वजस्तंभ: प्रवेश और गर्भगृह के बीच।
- 10प्राण प्रतिष्ठा: निर्माण पूर्ण → शुभ मुहूर्त → प्राण प्रतिष्ठा = अनिवार्य।





