ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
मंदिर वास्तु📜 वास्तु शिल्प शास्त्र, आगम शास्त्र1 मिनट पठन

मंदिर निर्माण के लिए वास्तु के क्या नियम हैं?

संक्षिप्त उत्तर

ऊंची भूमि, पूर्व/उत्तर प्रवेश, वास्तु पुरुष मंडल (ब्रह्मस्थान=गर्भगृह), शास्त्रीय अनुपात, पत्थर, गर्भगृह=3 बंद/1 द्वार, परिक्रमा पथ, ध्वजस्तंभ, प्राण प्रतिष्ठा अनिवार्य।

📖

विस्तृत उत्तर

मंदिर निर्माण वास्तु — मुख्य नियम:

  1. 1स्थान: ऊंचा भूमि, जल स्रोत निकट, शुभ वृक्ष। श्मशान/अशुद्ध भूमि वर्जित।
  2. 2दिशा: गर्भगृह = पश्चिम/दक्षिण। प्रवेश = पूर्व/उत्तर (सर्वोत्तम)।
  3. 3वास्तु पुरुष मंडल: 64/81 पद (खाने) — ब्रह्मस्थान (केंद्र) = गर्भगृह।
  4. 4अनुपात: ऊंचाई:चौड़ाई = शास्त्रीय अनुपात। शिखर = गर्भगृह ऊपर।
  5. 5सामग्री: पत्थर (ग्रेनाइट/बलुआ) = सर्वोत्तम। ईंट/लकड़ी = भी।
  6. 6गर्भगृह: केंद्र, 3 तरफ बंद, 1 द्वार, अंधेरा।
  7. 7मंडप: सभा/नृत्य/भोग = अलग-अलग।
  8. 8परिक्रमा पथ: गर्भगृह चारों ओर।
  9. 9ध्वजस्तंभ: प्रवेश और गर्भगृह के बीच।
  10. 10प्राण प्रतिष्ठा: निर्माण पूर्ण → शुभ मुहूर्त → प्राण प्रतिष्ठा = अनिवार्य।
📜
शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शिल्प शास्त्र, आगम शास्त्र
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

निर्माणवास्तुनियममंदिरशिल्प

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

मंदिर निर्माण के लिए वास्तु के क्या नियम हैं — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको मंदिर वास्तु से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर वास्तु शिल्प शास्त्र, आगम शास्त्र पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।