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निर्माण से जुड़े सभी प्रश्न(11)

निर्माण पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 11 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

अमरावती किससे बनी है?

अमरावती विशुद्ध जाम्बूनद स्वर्ण और हीरों से बनी है। इसमें सांसारिक ईंट या पत्थर का उपयोग नहीं हुआ। महलों के खंभे ठोस हीरों से बने हैं।

#अमरावती#जाम्बूनद स्वर्ण#हीरे
लोक

अमरावती का निर्माण किसने किया?

अमरावती का निर्माण देवताओं के सर्वोच्च वास्तुकार विश्वकर्मा (त्वष्टा) ने किया। वे ब्रह्मा जी या कश्यप के पुत्र और देवताओं के महान शिल्पकार हैं।

#अमरावती#विश्वकर्मा#निर्माण
दिव्यास्त्र

नागपाश का निर्माण किसने किया था?

कुछ कथाओं के अनुसार नागपाश का निर्माण स्वयं ब्रह्मा ने एक विशेष यज्ञ द्वारा किया था, जिसे बाद में उन्होंने महादेव को दे दिया था।

#नागपाश#निर्माण#ब्रह्मा
दिव्यास्त्र

वज्र का निर्माण किसने किया?

वज्र का निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने महर्षि दधीचि की रीढ़ की हड्डी से किया था।

#वज्र#विश्वकर्मा#निर्माण
दिव्यास्त्र

वज्र किसकी हड्डियों से बना है?

वज्र का निर्माण महर्षि दधीचि की रीढ़ की हड्डी से देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया था।

#वज्र#दधीचि#अस्थियाँ
मंदिर वास्तु

मंदिर निर्माण के लिए वास्तु के क्या नियम हैं?

ऊंची भूमि, पूर्व/उत्तर प्रवेश, वास्तु पुरुष मंडल (ब्रह्मस्थान=गर्भगृह), शास्त्रीय अनुपात, पत्थर, गर्भगृह=3 बंद/1 द्वार, परिक्रमा पथ, ध्वजस्तंभ, प्राण प्रतिष्ठा अनिवार्य।

#निर्माण#वास्तु#नियम
वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ी किस दिशा में होनी चाहिए

सीढ़ी नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), दक्षिण या पश्चिम में हो। ईशान कोण में सीढ़ी सबसे बड़ा दोष। घुमाव clockwise, सीढ़ियां विषम संख्या में। सीढ़ी के नीचे पूजा स्थल या शयनकक्ष न बनाएं।

#सीढ़ी#दिशा#वास्तु
वास्तु शास्त्र

घर बनाते समय नींव में क्या रखना चाहिए वास्तु अनुसार

नींव में नवरत्न/पंचरत्न, पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, पीतल, लोहा), नवधान्य, ताम्र पत्र (स्वस्तिक सहित), सिक्के और गंगाजल रखें। ईशान कोण से नींव आरंभ करें, गणपति पूजन और भूमि पूजन अवश्य करें।

#नींव#भूमि पूजन#वास्तु
वास्तु शास्त्र

भूमि पूजन में कौन से देवताओं की पूजा करें

भूमि पूजन में गणेश, भूमि देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष, अष्ट दिक्पाल (इंद्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान), नवग्रह, नाग देवता और विश्वकर्मा की पूजा करें। ईशान कोण से आरंभ करें।

#भूमि पूजन#वास्तु पुरुष#निर्माण
हवन

हवन में कुंड की ईंटें किस प्रकार की होनी चाहिए

हवनकुण्ड ईंटें: शुद्ध मिट्टी (सीमेंट/रासायनिक वर्जित)। वर्गाकार=गृहस्थ, वृत्ताकार=शान्ति। 1×1 हाथ (छोटा) से 9×9। ताँबे कुण्ड=आधुनिक विकल्प। मिट्टी=सर्वसरल+शुभ।

#हवन कुण्ड#ईंट#निर्माण
संस्कार विधि

भूमि पूजन में नागबलि का क्या विधान है?

नागबलि: भूमि = नाग निवास (खोदना=अनुमति), शेषनाग (भवन स्थिरता), सर्प दोष शांति, वास्तु दोष निवारण। विधि: नाग प्रतिमा → अष्टनाग मंत्र → दूध-जल → भूमि स्थापन → हवन। त्र्यम्बकेश्वर/रामेश्वरम प्रमुख।

#नागबलि#भूमि पूजन#नाग
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