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वास्तु शास्त्र📜 गृह्यसूत्र, मयमतम्, वास्तु शास्त्र, अथर्ववेद2 मिनट पठन

भूमि पूजन में कौन से देवताओं की पूजा करें

संक्षिप्त उत्तर

भूमि पूजन में गणेश, भूमि देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष, अष्ट दिक्पाल (इंद्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान), नवग्रह, नाग देवता और विश्वकर्मा की पूजा करें। ईशान कोण से आरंभ करें।

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विस्तृत उत्तर

भूमि पूजन (भूमि शोधन/भूम्यारंभ संस्कार) किसी भी निर्माण कार्य से पहले अनिवार्य विधि है। गृह्यसूत्रों और वास्तु शास्त्र में विभिन्न देवताओं के पूजन का विधान है।

प्रमुख देवता जिनकी पूजा अनिवार्य है

  1. 1श्री गणेश — सर्वप्रथम विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा। किसी भी शुभ कार्य का आरंभ गणपति पूजन से होता है।
  1. 1भूमि देवी (पृथ्वी माता) — भूमि की अधिष्ठात्री देवी। 'ॐ भूम्यै नमः' मंत्र से पूजन। अथर्ववेद में पृथ्वी सूक्त (12.1) भूमि देवी की स्तुति है।
  1. 1वास्तु पुरुष — वास्तु के अधिष्ठाता देवता। 'ॐ वास्तोष्पते प्रतिजानीह्यस्मान्...' (ऋग्वेद 7.54.1) मंत्र से पूजन।
  1. 1अष्ट दिक्पाल — आठ दिशाओं के स्वामी देवता:
  • पूर्व — इंद्र
  • आग्नेय — अग्नि
  • दक्षिण — यम
  • नैऋत्य — निऋति
  • पश्चिम — वरुण
  • वायव्य — वायु
  • उत्तर — कुबेर
  • ईशान — ईशान (शिव)
  1. 1नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु — इन नवग्रहों की स्थापना और पूजन।
  1. 1पंचलोकपाल — ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य, गणेश — कुछ परंपराओं में इनका पूजन होता है।
  1. 1नाग देवता (सर्प) — भूमि के भीतर निवास करने वाले नाग देवता को शांत करने हेतु। अनंत नाग या वासुकि की पूजा।
  1. 1विश्वकर्मा — देवशिल्पी और वास्तु के आदि गुरु। निर्माण कार्य के संरक्षक देवता।

भूमि पूजन की संक्षिप्त विधि

  1. 1शुभ मुहूर्त में ईशान कोण से आरंभ।
  2. 2भूमि पर गोबर का लेपन और गंगाजल छिड़काव।
  3. 3गणपति पूजन → कलश स्थापना → नवग्रह पूजन → वास्तु पुरुष पूजन → दिक्पाल पूजन → भूमि देवी पूजन।
  4. 4हवन — वास्तु शांति मंत्रों से आहुतियां।
  5. 5भूमि खनन — ईशान कोण में पहली कुदाल/खनन।
  6. 6पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण।

ध्यान दें: संपूर्ण विधि किसी योग्य पुरोहित/पंडित से कराएं। क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार कुछ अतिरिक्त देवताओं की पूजा भी हो सकती है।

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शास्त्रीय स्रोत
गृह्यसूत्र, मयमतम्, वास्तु शास्त्र, अथर्ववेद
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