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संस्कार विधि📜 वास्तु शास्त्र, गरुड़ पुराण, ज्योतिष ग्रंथ2 मिनट पठन

भूमि पूजन में नागबलि का क्या विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

नागबलि: भूमि = नाग निवास (खोदना=अनुमति), शेषनाग (भवन स्थिरता), सर्प दोष शांति, वास्तु दोष निवारण। विधि: नाग प्रतिमा → अष्टनाग मंत्र → दूध-जल → भूमि स्थापन → हवन। त्र्यम्बकेश्वर/रामेश्वरम प्रमुख।

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विस्तृत उत्तर

भूमि पूजन (निर्माण आरम्भ) में नागबलि = भूमि के अधिष्ठाता नागों (सर्पों) की पूजा:

  1. 1भूमि = नाग निवास: पृथ्वी के भीतर = नाग लोक (पाताल)। निर्माण = भूमि खोदना = नागों का निवास अस्थिर। नागबलि = नागों से क्षमा और अनुमति माँगना।
  1. 1शेषनाग: पृथ्वी शेषनाग के फन पर स्थिर है। भूमि खोदने से पूर्व शेषनाग पूजा = भवन स्थिर रहे।
  1. 1सर्प दोष शांति: यदि भूमि खोदते समय कोई सर्प मरे = सर्प दोष (नाग दोष)। नागबलि = इस दोष की शांति। भवन में सर्प दोष = दुर्घटना, रोग, अशांति।
  1. 1वास्तु शास्त्र: भवन नींव में नागबलि = वास्तु दोष निवारण। नाग = पृथ्वी तत्व के रक्षक।

विधि (संक्षिप्त): भूमि पूजन दिवस → नाग प्रतिमा (चाँदी/ताँबा) स्थापना → 'ॐ नमो भगवते वासुकिनागाय नमः' + अष्टनाग स्मरण → दूध-जल अभिषेक → भूमि में प्रतिमा स्थापन → हवन → ब्राह्मण भोज।

विशेष: त्र्यम्बकेश्वर (नासिक) और रामेश्वरम = नागबलि विधान के प्रमुख केन्द्र। कालसर्प दोष शांति भी नागबलि से।

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शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र, गरुड़ पुराण, ज्योतिष ग्रंथ
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