विस्तृत उत्तर
मुंडन (चूड़ाकर्म) संस्कार में कटे बालों का सम्मानपूर्वक विसर्जन अनिवार्य है:
विसर्जन स्थान
- 1पवित्र नदी (सर्वोत्तम): गंगा, यमुना, सरस्वती या कोई भी पवित्र नदी में बाल प्रवाहित करना सर्वश्रेष्ठ। गंगा = परम पवित्र।
- 1तीर्थ स्थान: काशी, प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन आदि तीर्थ स्थानों पर विसर्जन अत्यंत शुभ। बहुत से परिवार मुंडन हेतु तीर्थ यात्रा करते हैं।
- 1समुद्र: समुद्र तट पर मुंडन और विसर्जन भी शुभ — रामेश्वरम, द्वारका, जगन्नाथ पुरी।
- 1सरोवर/तालाब: पवित्र सरोवर (पुष्कर, मानसरोवर) — यदि नदी दूर हो।
- 1वृक्ष जड़ में: यदि नदी/तीर्थ उपलब्ध न हो = पीपल या बरगद के वृक्ष की जड़ में गाड़ दें। मिट्टी से ढकें।
विसर्जन कहाँ न करें
- ▸कूड़ेदान/सड़क पर फेंकना = अपमान।
- ▸शौचालय/नाली में = अत्यंत अशुभ।
- ▸घर में रखना = अशुभ (कुछ परम्पराओं में)।
विधि: मुंडन के बाद बाल एकत्रित → कपड़े/पत्ते में लपेटें → 'ॐ' बोलकर नदी/जलाशय में विसर्जित → शिशु को स्नान कराएँ → हल्दी-चन्दन लगाएँ → शिशु सिर पर दही/शहद/घी लगाएँ।
मुंडन आयु: 1, 3 या 5 वर्ष (विषम वर्ष)। कुल परम्परा अनुसार।





