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संस्कार विधि📜 गृह्यसूत्र, वास्तु शास्त्र, लोक परम्परा2 मिनट पठन

गृह प्रवेश पूजा में दूध उबालने का क्या विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

दूध उबालना: दूध=समृद्धि/पवित्रता, उफनना=प्रचुरता ('सुख बाहर बहे'), रसोई शुद्धि (अन्नपूर्णा आह्वान), खीर=प्रथम प्रसाद। उफनने दें (शुभ), रोकें नहीं। नई रसोई का प्रथम कार्य।

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विस्तृत उत्तर

गृह प्रवेश पूजा में दूध उबालना अत्यंत शुभ विधान:

विधि: नवगृह प्रवेश के बाद, नई रसोई में सबसे पहले दूध उबालें। दूध उफनकर बर्तन से बाहर आए = अत्यंत शुभ संकेत।

अर्थ

  1. 1दूध = समृद्धि: दूध = श्वेत = शुद्ध, पवित्र, पोषक। नये घर में पहला कार्य = दूध उबालना = 'इस घर में पोषण और समृद्धि कभी कम न हो।'
  1. 1उफनना = प्रचुरता: दूध उफनकर बाहर आना = प्रचुरता, बहुतायत। 'इस घर में सुख-समृद्धि बाहर तक बहे' = अत्यंत शुभ।
  1. 1अग्नि = रसोई शुद्धि: नये चूल्हे/गैस पर पहली बार अग्नि = रसोई देवता (अन्नपूर्णा) का आह्वान। दूध = सबसे पवित्र पदार्थ = रसोई की प्रथम सामग्री।
  1. 1खीर प्रसाद: उबले दूध से खीर (चावल+दूध+चीनी) बनाएँ = गृह प्रवेश प्रसाद। परिवार और पड़ोसियों को बाँटें।

नियम: दूध उफनने दें — रोकें नहीं, जलने न दें। उफना दूध = शुभ। दूध न उफने/जल जाए = पूजा दोहराएँ (कुछ परम्पराओं में)।

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शास्त्रीय स्रोत
गृह्यसूत्र, वास्तु शास्त्र, लोक परम्परा
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