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संस्कार विधि📜 गृह्यसूत्र, वास्तु शास्त्र, गरुड़ पुराण1 मिनट पठन

गृह प्रवेश पूजा में गाय क्यों प्रवेश कराते हैं सबसे पहले?

संक्षिप्त उत्तर

गाय प्रवेश: 33 करोड़ देवता वास (सब देवता प्रवेश), पवित्रतम (गोमूत्र=भूमि शुद्धि), लक्ष्मी/कामधेनु (धन-समृद्धि), वास्तु दोष शांति (नकारात्मकता दूर)। गाय → गृहस्वामी → परिवार क्रम।

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विस्तृत उत्तर

नवनिर्मित/नवक्रय गृह में सर्वप्रथम गाय का प्रवेश कराने का विशेष विधान है:

  1. 1गोमाता = समस्त देवता: गाय में 33 करोड़ देवताओं का वास माना गया है। गाय प्रवेश = समस्त देवताओं का गृह में प्रवेश।
  1. 1पवित्रता: गाय = पवित्रतम प्राणी। उसका प्रवेश = गृह शुद्ध और पवित्र। गोमय (गोबर), गोमूत्र = शुद्धिकारक। गाय चलती है = गोमूत्र/गोबर = भूमि शुद्धि।
  1. 1लक्ष्मी स्वरूप: गाय = लक्ष्मी/कामधेनु का स्वरूप। गाय प्रवेश = लक्ष्मी प्रवेश = धन-समृद्धि।
  1. 1वास्तु दोष शांति: नये गृह में वास्तु दोष हो सकते हैं। गाय की उपस्थिति = नकारात्मक ऊर्जा दूर। गाय = सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत।
  1. 1शकुन: गाय स्वेच्छा से घर में प्रवेश करे = अत्यंत शुभ। अनिच्छा = पुनर्विचार।

विधि: नवगृह प्रवेश दिवस → गाय को फूल-माला, तिलक, गुड़ खिलाएँ → गाय सबसे पहले गृह में प्रवेश → गाय के पीछे गृहस्वामी दम्पत्ति → फिर परिवार।

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शास्त्रीय स्रोत
गृह्यसूत्र, वास्तु शास्त्र, गरुड़ पुराण
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