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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन से कामधेनु एक दिव्य गौ के रूप में प्रकट हुई। कामधेनु को ऐसी गाय माना जाता है जो यज्ञ, पूजा और धर्म-कर्म के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। समुद्र मंथन में उसका प्राकट्य यह दिखाता है कि समृद्धि केवल सोना या अमृत नहीं, बल्कि पोषण, धर्म और यज्ञ का आधार भी है। कामधेनु को ऋषियों और ब्राह्मणों के यज्ञ-कर्म के लिए स्वीकार किया गया। उसका संबंध गाय की पवित्रता और सनातन धर्म में गौ के पोषणकारी स्वरूप से भी जुड़ा है।
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