विस्तृत उत्तर
लाजा होम विवाह संस्कार का महत्वपूर्ण अंग है:
लाजा = भुने हुए धान/चावल (खील/लावा)।
विधि: वधू के भाई (या पिता) वधू की अंजलि में लाजा (भुने चावल) देते हैं। वधू अग्नि में लाजा की आहुति देती है। वर उसका हाथ पकड़कर सहायता करता है।
अर्थ
- 1अन्न समृद्धि: लाजा = अन्न। अग्नि में अर्पण = 'हे अग्नि देव! हमारा गृहस्थ जीवन अन्न-धन्य से भरपूर रहे।'
- 1सम्पत्ति साझेदारी: वधू (पत्नी) अग्नि में आहुति देती है = गृहस्थ यज्ञ में पत्नी = सहभागिनी। पति-पत्नी मिलकर गृहस्थ धर्म निभाएँ।
- 1पितृ गृह से विदाई: लाजा भाई/पिता देते हैं = पितृ गृह का अंतिम योगदान। वधू पितृ गृह का अन्न अग्नि को अर्पित कर नवजीवन आरम्भ करती है।
- 1उर्वरता प्रतीक: अन्न = उर्वरता, सन्तान, समृद्धि। अग्नि में लाजा = देवताओं से उर्वरता और सुखी दाम्पत्य की प्रार्थना।
मंत्र: 'अर्यमणं देवं कन्या अग्निमयक्षत। स इमां देवो अर्यमा प्रेतो मुञ्चतु मा पतेः।'





