विस्तृत उत्तर
विवाह में नवदम्पत्ति को ध्रुव तारा और अरुंधति तारा दिखाना प्राचीन वैदिक परम्परा है:
ध्रुव तारा (Pole Star)
- 1स्थिरता: ध्रुव तारा आकाश में सदा स्थिर रहता है — अन्य तारे घूमते हैं, ध्रुव नहीं। नवदम्पत्ति को दिखाना = 'तुम्हारा प्रेम और विवाह ध्रुव तारे की भाँति अटल, अचल, स्थिर रहे।'
- 2भक्त ध्रुव: बालक ध्रुव ने कठोर तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया = अटल स्थान प्राप्त। संदेश = 'दृढ़ संकल्प से सब सम्भव।'
अरुंधति तारा (Alcor — सप्तर्षि के पास)
- 1पातिव्रत्य: अरुंधति = महर्षि वशिष्ठ की पत्नी = आदर्श पतिव्रता। अरुंधति तारा = पातिव्रत्य/निष्ठा का प्रतीक।
- 2वशिष्ठ-अरुंधति युगल: सप्तर्षि मण्डल में वशिष्ठ तारे के अत्यंत निकट एक छोटा तारा = अरुंधति। दोनों = आदर्श दम्पत्ति — सदा साथ, कभी अलग नहीं।
- 3परीक्षा: अरुंधति तारा अत्यंत सूक्ष्म — दिखाई देना = तीक्ष्ण दृष्टि + ध्यान। नववधू को दिखाना = 'तुम्हारी दृष्टि सूक्ष्म और एकाग्र हो।'
विधि: सप्तपदी के बाद, रात्रि में, वर वधू को उत्तर दिशा में ध्रुव तारा दिखाता है। फिर सप्तर्षि मण्डल में अरुंधति दिखाता है।
मंत्र: 'ध्रुवमसि ध्रुवं त्वा पश्यामि ध्रुवेद्ध मे।' (तू ध्रुव है, मैं तुझे ध्रुव (स्थिर) देखता हूँ।)





