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विस्तृत उत्तर
नान्दीमुख श्राद्ध परिवार में मांगलिक कार्य होने पर किया जाता है। जब विवाह, उपनयन संस्कार या पुत्र-जन्म जैसे शुभ कार्य होते हैं, तब आभ्युदयिक या वृद्धिश्राद्ध किया जाता है। इस श्राद्ध में पितरों को नान्दीमुख कहा जाता है, क्योंकि उन्हें प्रसन्न, संतुष्ट और आह्लादित माना जाता है। यह सामान्य मृत्यु या पितृ पक्ष के अश्रुमुख श्राद्ध से भिन्न है, जहाँ पितरों को दुःख या शोक से जुड़ा माना जाता है।
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