विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के तेईसवें अध्याय में शिशुमार चक्र के अंग-विन्यास का विस्तृत वर्णन है। इस वर्णन के अनुसार शिशुमार की पूंछ के अंतिम छोर पर स्थिर तारा ध्रुव (Dhruva) स्थित है। ध्रुव तारा इस पूरे शिशुमार चक्र की धुरी है जिसके चारों ओर समस्त ग्रह और नक्षत्र परिक्रमा करते हैं। पूंछ के अन्य भागों में प्रजापति, अग्नि देव, इन्द्र (स्वर्ग के राजा) और धर्मराज स्थित हैं। पूंछ के आधार पर धाता और विधाता का स्थान है। इस प्रकार शिशुमार की पूंछ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके अंतिम छोर पर ध्रुव तारा है जो सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय व्यवस्था का केंद्र है। जिस प्रकार बैल धान कूटने के खंभे से बंधे रहकर उसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं उसी प्रकार ये समस्त ग्रह और देवता काल-चक्र से बंधे रहकर ध्रुवलोक की परिक्रमा करते हैं।
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