📖
विस्तृत उत्तर
कन्यादान = महादान — सभी दानों में श्रेष्ठ।
कारण
- 1कन्या = लक्ष्मी/देवी स्वरूप। दान = देवी अर्पण = सर्वोच्च।
- 2सबसे प्रिय वस्तु: माता-पिता के लिए = पुत्री = सबसे प्रिय। सबसे प्रिय = दान = सबसे बड़ा त्याग = सबसे बड़ा पुण्य।
- 3वंश वृद्धि: कन्या = दो परिवार जोड़ती, नया वंश शुरू। = सृष्टि दान।
- 4विश्वास: अपनी पुत्री = दूसरे परिवार को सौंपना = परम विश्वास + त्याग।
मंत्र: *'कन्यां कनकसम्पन्नां... दत्तां दानेन मे प्रभो'* — कन्यादान मंत्र। पिता = दान करता, वर = ग्रहण।
आधुनिक दृष्टि: कन्यादान = 'कन्या वस्तु नहीं' — कुछ लोग विरोध करते। शास्त्रीय अर्थ = सम्मान + विश्वास + त्याग = सम्पत्ति दान नहीं, संबंध दान। आधुनिक विवाह = कन्या सहमति = अनिवार्य।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





