विस्तृत उत्तर
जिन पुण्यवान आत्माओं ने अपने जीवन में सत्य, धर्म, दान और अहिंसा का पालन किया है, उन्हें यमराज का स्वरूप अत्यंत सौम्य, शांत, और मुकुट तथा कुंडल धारण किए हुए देव रूप में प्रतीत होता है। गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि जब कोई अत्यंत पुण्यात्मा, जिसने अन्न, वस्त्र, गौ अथवा विद्या का दान किया हो, यमलोक के समीप पहुँचती है, तो धर्मराज स्वयं अपने आसन से उठकर उस पुण्यात्मा का स्वागत करते हैं और उसे सम्मानपूर्वक अपनी सभा में स्थान देते हैं। यमराज का यह स्वरूप कर्म-सिद्धांत का दर्पण है, जहाँ जीवात्मा अपने ही कर्मों की छाया यमराज के स्वरूप में देखती है।
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