विस्तृत उत्तर
सकाम कर्म, बड़े-बड़े दान, भौतिक उपलब्धियाँ और विलासिता की तीव्र इच्छा वितल लोक की प्राप्ति कराते हैं, यदि उनके साथ आध्यात्मिक ज्ञान, वैराग्य और भगवत्प्रेम का अभाव हो। शास्त्रों के अनुसार जब कोई व्यक्ति भौतिक सफलता को ही जीवन का परम लक्ष्य मानता है, धन, स्वर्ण, ऐश्वर्य और इंद्रिय सुखों की लालसा रखता है, तथा आध्यात्मिकता से शून्य रहता है, तब मृत्यु के बाद उसकी आत्मा वितल जैसे बिल-स्वर्गों की ओर आकर्षित होती है। तमोगुण और रजोगुण की अधिकता, पर सकाम पुण्यों के कारण उसे नरक में न भेजकर वैभवशाली पाताल लोकों में भेजा जाता है।
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