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पौराणिक कथा📜 भागवत पुराण (4.8-12), विष्णु पुराण3 मिनट पठन

ध्रुव ने किस उम्र में तपस्या की क्या प्राप्त किया

संक्षिप्त उत्तर

ध्रुव ने 5 वर्ष की आयु में 6 मास तपस्या की (सौतेली माता के अपमान से प्रेरित)। विष्णु प्रसन्न हुए — ध्रुवलोक (ध्रुव तारा), 36,000 वर्ष राज्य और शाश्वत स्थान प्राप्त। शिक्षा: आयु बाधा नहीं, अपमान प्रेरणा बन सकता है।

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विस्तृत उत्तर

ध्रुव की कथा भागवत पुराण (स्कंध 4, अध्याय 8-12) में वर्णित है।

कथा

ध्रुव राजा उत्तानपाद के पुत्र थे। उनकी माता सुनीति थी (प्रथम पत्नी) और सौतेली माता सुरुचि (राजा की प्रिय पत्नी)। एक दिन 5 वर्ष की आयु में ध्रुव पिता की गोद में बैठना चाहा तो सुरुचि ने अपमानित करते हुए कहा — 'तू मेरे गर्भ से पैदा नहीं, अतः राजा की गोद में बैठने का अधिकार नहीं। भगवान की तपस्या कर, तभी यह अधिकार मिलेगा।'

दुःखी ध्रुव ने माता सुनीति से पूछा। माता ने कहा — 'पुत्र, विष्णु भगवान ही सबके शरणदाता हैं।' 5 वर्ष का बालक वन में तपस्या करने चला गया।

मार्ग में नारद मुनि मिले जिन्होंने 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र दिया। ध्रुव ने मधुवन में कठोर तपस्या की — पहले फल, फिर पत्ते, फिर जल, फिर वायु और अंत में श्वास भी रोककर।

6 मास की तपस्या से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और प्रकट हुए।

क्या प्राप्त किया

  1. 1ध्रुवलोक (ध्रुव तारा/Polaris) — विष्णु ने ध्रुव को अचल, शाश्वत स्थान दिया — ध्रुव तारा — जो सदा स्थिर रहता है और जिसके चारों ओर अन्य तारे परिक्रमा करते हैं।
  1. 1राज्य — पृथ्वी पर 36,000 वर्ष तक धर्मपूर्वक राज्य।
  1. 1अमरत्व — ध्रुवलोक में शाश्वत निवास।

ध्रुव का पश्चाताप

जब विष्णु प्रकट हुए तो ध्रुव ने कहा — 'मैं कांच के टुकड़े (पिता की गोद) के लिए आया था, मुझे चिंतामणि (भगवान स्वयं) मिल गए।' अर्थात भगवान से सांसारिक वस्तु मांगना उनकी महिमा को कम आंकना है।

शिक्षा

  • आयु कोई बाधा नहीं — 5 वर्ष का बालक भी भगवान प्राप्त कर सकता है।
  • अपमान प्रेरणा बन सकता है — ध्रुव का अपमान उसकी सबसे बड़ी प्रेरणा बना।
  • भगवान भक्ति से प्रसन्न होते हैं, उम्र से नहीं।
  • सांसारिक इच्छा से आरंभ करो, परंतु भगवान मिलें तो सांसारिक इच्छा तुच्छ लगती है।
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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण (4.8-12), विष्णु पुराण
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