ध्रुव तारा: स्थिरता (विवाह अचल), भक्त ध्रुव (दृढ़ संकल्प)। अरुंधति: पातिव्रत्य (वशिष्ठ पत्नी), आदर्श दम्पत्ति (सदा साथ), सूक्ष्म दृष्टि परीक्षा। विधि: सप्तपदी बाद, उत्तर दिशा। 'ध्रुवमसि ध्रुवं...' मंत्र।
- 1स्थिरता: ध्रुव तारा आकाश में सदा स्थिर रहता है — अन्य तारे घूमते हैं, ध्रुव नहीं। नवदम्पत्ति को दिखाना = 'तुम्हारा प्रेम और विवाह ध्रुव तारे की भाँति अटल, अचल, स्थिर रहे।'
- 2भक्त ध्रुव: बालक ध्रुव ने कठोर तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया = अटल स्थान प्राप्त। संदेश = 'दृढ़ संकल्प से सब सम्भव।'
- 3पातिव्रत्य: अरुंधति = महर्षि वशिष्ठ की पत्नी = आदर्श पतिव्रता। अरुंधति तारा = पातिव्रत्य/निष्ठा का प्रतीक।
- 4वशिष्ठ-अरुंधति युगल: सप्तर्षि मण्डल में वशिष्ठ तारे के अत्यंत निकट एक छोटा तारा = अरुंधति। दोनों = आदर्श दम्पत्ति — सदा साथ, कभी अलग नहीं।
- 5परीक्षा: अरुंधति तारा अत्यंत सूक्ष्म — दिखाई देना = तीक्ष्ण दृष्टि + ध्यान। नववधू को दिखाना = 'तुम्हारी दृष्टि सूक्ष्म और एकाग्र हो।'