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विस्तृत उत्तर
महातल के नाग अपनी पत्नियों, संतानों, मित्रों और कुटुंबियों के साथ रहते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है कि गरुड़ के निरंतर भय के बावजूद ये नाग अपने परिवार, पत्नी, संतान, मित्र और कुटुंब के संग कभी-कभी प्रमत्त होकर महातल में विहार करते हैं। वे महातल के भौतिक सुख, मणियों और ऐश्वर्य का आनंद लेते हैं, लेकिन उनके जीवन में गरुड़ का भय स्थायी रूप से बना रहता है।
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