विस्तृत उत्तर
गरुडास्त्र की उत्पत्ति उस पौराणिक कथा से हुई है जो महर्षि कश्यप और उनकी दो पत्नियों, बहनों विनता और कद्रू से आरंभ होती है। विनता पक्षियों की माता बनीं, जबकि कद्रू ने एक हजार नागों को पुत्रों के रूप में जन्म दिया। कद्रू ने छल से विनता को शर्त में हराकर दासी बना लिया। इसी दासता के अंधकार में विनता के पुत्र पक्षीराज गरुड़ का जन्म हुआ। गरुड़ ने अपनी माता को मुक्त कराने के लिए नागों से अमृत लाने का प्रण लिया, देवताओं से युद्ध किया और अमृत कलश प्राप्त किया। इंद्र ने गरुड़ को वरदान दिया कि सभी नाग उनका प्राकृतिक भोजन होंगे। यही मूल कथा गरुडास्त्र की आत्मा है। जब कोई योद्धा गरुडास्त्र का आह्वान करता है, तो वह उस ब्रह्मांडीय नियम को जागृत करता है जो गरुड़ की नागों पर विजय को स्थापित करता है।
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