विस्तृत उत्तर
महातल लोक के निवासी गरुड़ से डरकर भी सुख इसलिए भोगते हैं क्योंकि वे अपने परिवार, ऐश्वर्य और भौतिक भोगों में प्रमत्त रहते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार काद्रवेय नाग गरुड़ से निरंतर भयभीत रहते हैं, फिर भी अपनी पत्नियों, संतानों, मित्रों और कुटुंबियों के संग कभी-कभी अत्यंत प्रमत्त होकर महातल में विहार करते हैं। वे मणि-रत्न, सुंदर महल, दिव्य वातावरण, रोग-रहित दीर्घायु और असीम भौतिक सुखों का उपभोग करते हैं। पर गरुड़ का भय उनके जीवन का स्थायी सत्य बना रहता है।
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