भूमि पूजन में नागबलि का क्या विधान है?
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नागबलि: भूमि = नाग निवास (खोदना=अनुमति), शेषनाग (भवन स्थिरता), सर्प दोष शांति, वास्तु दोष निवारण। विधि: नाग प्रतिमा → अष्टनाग मंत्र → दूध-जल → भूमि स्थापन → हवन। त्र्यम्बकेश्वर/रामेश्वरम प्रमुख।
- 1भूमि = नाग निवास: पृथ्वी के भीतर = नाग लोक (पाताल)। निर्माण = भूमि खोदना = नागों का निवास अस्थिर। नागबलि = नागों से क्षमा और अनुमति माँगना।
- 2शेषनाग: पृथ्वी शेषनाग के फन पर स्थिर है। भूमि खोदने से पूर्व शेषनाग पूजा = भवन स्थिर रहे।
- 3सर्प दोष शांति: यदि भूमि खोदते समय कोई सर्प मरे = सर्प दोष (नाग दोष)। नागबलि = इस दोष की शांति। भवन में सर्प दोष = दुर्घटना, रोग, अशांति।
- 4वास्तु शास्त्र: भवन नींव में नागबलि = वास्तु दोष निवारण। नाग = पृथ्वी तत्व के रक्षक।
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