विस्तृत उत्तर
पाताल लोकों में दैत्य, दानव और नाग निवास करते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार बिल-स्वर्गों में रहने वाले दैत्य, दानव और काद्रवेय नाग गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हैं और अपनी पत्नी, पुत्र, बंधु-बांधव तथा अनुचरों के साथ भौतिक सुखों में रहते हैं। सबसे अंतिम पाताल, जिसे नागलोक कहा जाता है, महानागों का साम्राज्य है। वहाँ नागराज वासुकि के नेतृत्व में शंख, कुलिक, महाशंख, श्वेत, धनंजय, धृतराष्ट्र, शंखचूड़, कम्बल, अश्वतर, देवदत्त आदि महानाग अपने-अपने कुनबों के साथ निवास करते हैं।
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