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विस्तृत उत्तर
पाताल लोक को नागलोक इसलिए कहा जाता है क्योंकि सात अधोलोकों की अंतिम और सबसे गहरी परत महान नागों का साम्राज्य है। यहाँ नागों के स्वामी वासुकि के नेतृत्व में शंख, कुलिक, महाशंख, श्वेत, धनंजय, धृतराष्ट्र, शंखचूड़, कम्बल, अश्वतर, देवदत्त आदि महानाग अपने-अपने कुलों के साथ निवास करते हैं। ये महाभोगी और अत्यंत क्रोधी नाग हैं। इनके किसी के पाँच, सात, दस, सौ या एक हजार तक फन हैं और उनके फनों पर लगी मणियाँ पाताल को प्रकाशित करती हैं।
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