विस्तृत उत्तर
देवी पूजन में सिंदूर का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। मां दुर्गा, मां काली, मां लक्ष्मी और अन्य शक्तिस्वरूपाओं को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन और शास्त्रसम्मत है। विशेष रूप से मां दुर्गा को सिंदूर बहुत प्रिय है और नवरात्रि में उनकी विदाई के समय सिंदूर खेला — जिसे सिंदूर दान भी कहते हैं — एक विशेष परंपरा है जिसमें भक्त माता को सिंदूर लगाकर स्वयं भी लगाते हैं।
देवी को अर्पित किए जाने वाले सिंदूर को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। बंगाल में 'सिंदूर खेला' की परंपरा बहुत प्रचलित है जिसमें सुहागिनें माता दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और उनसे सौभाग्य का आशीष मांगती हैं। मां की माँग या मूर्ति के मस्तक पर सिंदूर लगाना उनके सुहागन स्वरूप को स्वीकार करना है क्योंकि माता पार्वती-दुर्गा भगवान शिव की पत्नी हैं।
कुमकुम और रोली भी देवी को अर्पित किए जाते हैं, जिनका उपयोग तिलक-पूजन में होता है। परंतु सिंदूर की विशेष मान्यता यह है कि यह मां की शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है। इसलिए देवी को सिंदूर अवश्य चढ़ाया जाता है और यह पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है।





