विस्तृत उत्तर
पूजा घर और मुख्य द्वार की दहलीज पर हल्दी-कुमकुम लगाना सनातन परंपरा का अनिवार्य अंग है।
धार्मिक कारण
- 1लक्ष्मी स्वागत — हल्दी-कुमकुम सौभाग्य और लक्ष्मी का प्रतीक है। दहलीज पर लगाने से लक्ष्मी जी का स्वागत होता है।
- 2सीमा रेखा — दहलीज पवित्र और सांसारिक क्षेत्र के बीच सीमा है। हल्दी-कुमकुम इस सीमा को पवित्र बनाती है।
- 3मांगलिक प्रतीक — हल्दी (पीला) बृहस्पति और शुभता का, कुमकुम (लाल) शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है।
- 4नकारात्मक ऊर्जा अवरोध — दहलीज पर शुभ चिह्न नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकता है।
आयुर्वेदिक/व्यावहारिक कारण
- 1हल्दी — प्राकृतिक जीवाणुरोधी (antibacterial) और एंटीफंगल। कीटाणु और कीट दहलीज पार करने से हिचकते हैं।
- 2कुमकुम — हल्दी और चूने (lime) के मिश्रण से बनता है। इसमें भी जीवाणुरोधी गुण हैं।
लगाने की विधि
- ▸दहलीज पर हल्दी का लेप लगाएं।
- ▸कुमकुम से बिंदी या स्वस्तिक बनाएं।
- ▸प्रतिदिन या विशेष पर्वों पर ताजा लगाएं।
- ▸कुछ परंपराओं में रोली (सिंदूर) का उपयोग भी होता है।





