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पूजा विधि📜 धार्मिक परंपरा, लोक मान्यता, आयुर्वेद2 मिनट पठन

पूजा घर की दहलीज पर हल्दी कुमकुम क्यों लगाते हैं

संक्षिप्त उत्तर

हल्दी-कुमकुम लक्ष्मी स्वागत, सौभाग्य और नकारात्मक ऊर्जा अवरोध का प्रतीक है। हल्दी प्राकृतिक जीवाणुरोधी है। दहलीज पवित्र-सांसारिक सीमा है जिसे हल्दी-कुमकुम पवित्र बनाती है। नियमित रूप से ताजा लगाएं।

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विस्तृत उत्तर

पूजा घर और मुख्य द्वार की दहलीज पर हल्दी-कुमकुम लगाना सनातन परंपरा का अनिवार्य अंग है।

धार्मिक कारण

  1. 1लक्ष्मी स्वागत — हल्दी-कुमकुम सौभाग्य और लक्ष्मी का प्रतीक है। दहलीज पर लगाने से लक्ष्मी जी का स्वागत होता है।
  2. 2सीमा रेखा — दहलीज पवित्र और सांसारिक क्षेत्र के बीच सीमा है। हल्दी-कुमकुम इस सीमा को पवित्र बनाती है।
  3. 3मांगलिक प्रतीक — हल्दी (पीला) बृहस्पति और शुभता का, कुमकुम (लाल) शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है।
  4. 4नकारात्मक ऊर्जा अवरोध — दहलीज पर शुभ चिह्न नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकता है।

आयुर्वेदिक/व्यावहारिक कारण

  1. 1हल्दी — प्राकृतिक जीवाणुरोधी (antibacterial) और एंटीफंगल। कीटाणु और कीट दहलीज पार करने से हिचकते हैं।
  2. 2कुमकुम — हल्दी और चूने (lime) के मिश्रण से बनता है। इसमें भी जीवाणुरोधी गुण हैं।

लगाने की विधि

  • दहलीज पर हल्दी का लेप लगाएं।
  • कुमकुम से बिंदी या स्वस्तिक बनाएं।
  • प्रतिदिन या विशेष पर्वों पर ताजा लगाएं।
  • कुछ परंपराओं में रोली (सिंदूर) का उपयोग भी होता है।
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शास्त्रीय स्रोत
धार्मिक परंपरा, लोक मान्यता, आयुर्वेद
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