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देवी पूजा📜 पूजा विधि परंपरा, सुहाग परंपरा2 मिनट पठन

देवी की पूजा में सुहाग सामग्री चढ़ाने का क्या नियम है?

संक्षिप्त उत्तर

सुहाग सामग्री: सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, काजल, बिंदी, चूड़ी, कंघी, शीशा, चुनरी, इत्र, पान। नियम: नई, अखंडित, लाल थाली में, स्नान कर अर्पित। प्रसाद सिंदूर स्वयं लगाएं। शुक्रवार/नवरात्रि विशेष। उद्देश्य: पति दीर्घायु, दांपत्य सुख।

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विस्तृत उत्तर

सुहाग सामग्री (सौभाग्य द्रव्य) विवाहित महिलाओं द्वारा देवी को चढ़ाई जाती है — यह सुहाग (वैवाहिक सौभाग्य) की रक्षा और दीर्घायु की कामना है।

सुहाग सामग्री में क्या-क्या होता है

  1. 1सिंदूर 2. कुमकुम/रोली 3. मेहंदी 4. काजल 5. बिंदी 6. लाल/हरी चूड़ियां 7. कंघी 8. शीशा (दर्पण) 9. लाल चुनरी 10. इत्र 11. पान-सुपारी 12. फल (नारियल/केला) 13. मिठाई 14. हल्दी

नियम

  1. 1सुहाग सामग्री नई और अखंडित होनी चाहिए।
  2. 2सामग्री एक लाल कपड़े या थाली में सजाकर रखें।
  3. 3विवाहित महिला स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर अर्पित करे।
  4. 4देवी को अर्पित करने के बाद प्रसाद रूप में सिंदूर/कुमकुम स्वयं लगाएं।
  5. 5शुक्रवार, मंगलवार, नवरात्रि, कजरी तीज पर विशेष।
  6. 6अविवाहित कन्याएं भी देवी को सुहाग सामग्री चढ़ा सकती हैं — अच्छे वर की कामना से।
  7. 7विधवा महिलाएं सुहाग सामग्री के स्थान पर अन्य सात्विक सामग्री (फल, पुष्प, मिठाई) चढ़ा सकती हैं।

उद्देश्य: पति की दीर्घायु, दांपत्य सुख, संतान सुख, परिवार कल्याण।

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शास्त्रीय स्रोत
पूजा विधि परंपरा, सुहाग परंपरा
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