विस्तृत उत्तर
पंचामृत का शाब्दिक अर्थ है 'पाँच अमृत' — पाँच पवित्र और पोषक तत्वों के मिश्रण से बना दिव्य द्रव। यह पूजा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, विशेष रूप से भगवान विष्णु और शिव के अभिषेक में इसका प्रयोग होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान विष्णु की पूजा बिना पंचामृत के अधूरी मानी जाती है।
पंचामृत बनाने की सामग्री और विधि: गाय का कच्चा दूध, गाय का ताजा दही, गाय का शुद्ध घी, शहद और मिश्री या शक्कर — ये पाँच मुख्य सामग्री हैं। पहले दही को चाँदी या ताँबे के पात्र में हल्का फेंटें। फिर उसमें गाय का दूध मिलाएं। इसके बाद मिश्री, शहद और घी — एक-एक करके मिलाएं। अंत में तुलसी के पत्ते डालें — यह विशेषतः विष्णु पूजा के लिए अनिवार्य है। पंचामृत को सूर्यास्त से पहले बना लेना चाहिए।
इसका उपयोग देव-अभिषेक के लिए होता है, जिसके लिए मंत्र बोला जाता है: 'पयोदधि घृतं चैव मधु च शर्करायुतम् / पञ्चामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।' अभिषेक के बाद यह पंचामृत प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है। इसे चरणामृत भी कहते हैं। गणेश जन्माष्टमी, सत्यनारायण कथा और अन्य व्रत-पर्वों में भी पंचामृत अनिवार्य है।





