विस्तृत उत्तर
पूजा में दूध चढ़ाने का महत्व शिव पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित है:
1हलाहल विष की कथा
शिव पुराण में वर्णित है — शिव ने समुद्र मंथन में हलाहल विष पिया था। देवताओं ने शिव को शीतल करने के लिए दूध और जल अर्पित किया। इसीलिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा।
2पंचामृत का अंग
पंचामृत में दूध प्रथम है — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर। पंचामृत अभिषेक सभी देवताओं के लिए शुभ।
3शुद्धता का प्रतीक
दूध शुद्धतम पेय है — गाय का दूध विशेष रूप से पवित्र। स्कंद पुराण: 'गव्यं दुग्धं शुभाय स्यात्' — गाय का दूध शुभ होता है।
4सात्विक नैवेद्य
दूध सात्विक भोजन है — देवता को अर्पित करने योग्य सर्वश्रेष्ठ नैवेद्य।
5श्रद्धा और भक्ति
गीता 9.26 — भगवान भक्तिपूर्वक अर्पित सरल वस्तु भी ग्रहण करते हैं। दूध सरल, शुद्ध और सात्विक अर्पण।
दूध अर्पण के नियम
- ▸ताजा दूध
- ▸गाय का दूध श्रेष्ठ
- ▸बर्तन स्वच्छ
- ▸शिवलिंग पर पतली धारा





