विस्तृत उत्तर
पूजा में आँखें बंद करने का महत्व पातंजल योग और उपनिषद में वर्णित है:
1बाहरी विक्षेप से मुक्ति
आँखें बाहरी संसार से जोड़ती हैं। बंद करने से बाहरी आकर्षण नहीं — मन भीतर की ओर।
2प्रत्याहार
पातंजल योग: 'प्रत्याहार' = इंद्रियों को बाहरी विषयों से खींचकर भीतर लाना। आँखें बंद करना — प्रत्याहार का पहला कदम।
3आंतरिक दर्शन
आँखें बंद करने पर मन में देवता का स्वरूप देखा जाता है — यह 'अंतर्दृष्टि' है। बाहरी मूर्ति से आंतरिक मूर्ति की ओर यात्रा।
4आज्ञा चक्र
योग शास्त्र: आँखें बंद करके भौंहों के बीच ध्यान केंद्रित करना — आज्ञा चक्र जागृति।
5भगवद् गीता (6.13)
नासिकाग्रे दृष्टिम् अवस्थाप्य' — नाक की नोक पर दृष्टि। यह आँखें आधी बंद की स्थिति है।
व्यावहारिक
आरती के समय — आँखें खुली, भगवान की लौ से नेत्र सींचें। ध्यान में — आँखें बंद।




