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पूजा रहस्य📜 पातंजल योग सूत्र — प्रत्याहार, उपनिषद, भगवद् गीता (6.13)1 मिनट पठन

पूजा के दौरान आंखें बंद क्यों करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

आँखें बंद क्यों: बाहरी विक्षेप से मुक्ति। प्रत्याहार (पातंजल) — इंद्रियों को भीतर लाना। मन में देवता का आंतरिक दर्शन। आज्ञा चक्र पर ध्यान। गीता 6.13: नाक की नोक पर दृष्टि — आधी बंद। आरती में आँखें खुली — लौ से नेत्र सींचें।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में आँखें बंद करने का महत्व पातंजल योग और उपनिषद में वर्णित है:

1बाहरी विक्षेप से मुक्ति

आँखें बाहरी संसार से जोड़ती हैं। बंद करने से बाहरी आकर्षण नहीं — मन भीतर की ओर।

2प्रत्याहार

पातंजल योग: 'प्रत्याहार' = इंद्रियों को बाहरी विषयों से खींचकर भीतर लाना। आँखें बंद करना — प्रत्याहार का पहला कदम।

3आंतरिक दर्शन

आँखें बंद करने पर मन में देवता का स्वरूप देखा जाता है — यह 'अंतर्दृष्टि' है। बाहरी मूर्ति से आंतरिक मूर्ति की ओर यात्रा।

4आज्ञा चक्र

योग शास्त्र: आँखें बंद करके भौंहों के बीच ध्यान केंद्रित करना — आज्ञा चक्र जागृति।

5भगवद् गीता (6.13)

नासिकाग्रे दृष्टिम् अवस्थाप्य' — नाक की नोक पर दृष्टि। यह आँखें आधी बंद की स्थिति है।

व्यावहारिक

आरती के समय — आँखें खुली, भगवान की लौ से नेत्र सींचें। ध्यान में — आँखें बंद।

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शास्त्रीय स्रोत
पातंजल योग सूत्र — प्रत्याहार, उपनिषद, भगवद् गीता (6.13)
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