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पूजा रहस्य📜 धर्म सिंधु, विष्णु पुराण — अक्षत विधान1 मिनट पठन

पूजा में अक्षत क्यों चढ़ाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

अक्षत क्यों: 'अ + क्षत' = अखंड, पूर्ण। अखंड भक्ति का प्रतीक। 'अन्नं ब्रह्म' (तैत्तिरीय उपनिषद)। समृद्धि और पूर्णता। हल्दी-रँगे पीले चावल — सोने का प्रतीक। खंडित चावल वर्जित।

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विस्तृत उत्तर

अक्षत का महत्व धर्म सिंधु और विष्णु पुराण में वर्णित है:

1'अक्षत' = अखंड

अ + क्षत' = जो खंडित न हो। अखंड, पूर्ण। भगवान को अखंड वस्तु अर्पित — अखंड भक्ति का प्रतीक।

2अन्न ब्रह्म

तैत्तिरीय उपनिषद: 'अन्नं ब्रह्म' — अन्न ब्रह्म है। अन्न अर्पण = ब्रह्म को ब्रह्म अर्पण।

3समृद्धि और पूर्णता

चावल — पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक। हल्दी में रँगे पीले चावल — सोने का प्रतीक।

4सर्वसुलभ

हर घर में उपलब्ध — इसलिए सभी पूजाओं में अक्षत।

5नियम

  • साबुत चावल — खंडित नहीं
  • बासमती या सामान्य — दोनों
  • हल्दी-रँगे पीले — विशेष शुभ
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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु, विष्णु पुराण — अक्षत विधान
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