विस्तृत उत्तर
पूजा में जल अर्पण का महत्व ऋग्वेद और धर्म सिंधु में वर्णित है:
1पंचतत्व में जल
जल पाँच तत्वों में से एक है। पूजा में जल अर्पण — ब्रह्मांड के जल तत्व का देव को अर्पण।
2आचमन और अर्घ्य
- ▸आचमन = स्वयं को और देव को शुद्ध करना
- ▸पाद्य = देव के चरण प्रक्षालन के लिए जल
- ▸अर्घ्य = सम्मान में जल — अतिथि को जल देना भारतीय परंपरा
3सूर्य को अर्घ्य
प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पण — 'ॐ सूर्याय नमः' — वैदिक परंपरा। सूर्य जीवनदाता हैं — जल अर्पण कृतज्ञता है।
4जल = जीवन
ऋग्वेद: 'आपो हिष्ठा मयोभुवः' — जल कल्याणकारी है। जल के बिना जीवन नहीं — देव को जल अर्पण सर्वोच्च अर्पण।
5शुद्धि
जल से स्नान, जल से आचमन — शुद्धि का सबसे सरल माध्यम।
जल अर्पण की विधि
- 1तांबे के पात्र में जल
- 2दोनों हाथों से या दाएं हाथ से
- 3भगवान के चरणों में अर्पित करते हुए मंत्र बोलें:
> 'ॐ नमो भगवते... इदं पाद्यं/अर्घ्यं समर्पयामि'





