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पूजा रहस्य📜 ऋग्वेद — जल सूक्त, धर्म सिंधु — अर्घ्य विधि, विष्णु पुराण2 मिनट पठन

पूजा में जल क्यों अर्पित किया जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

जल क्यों: पंचतत्व में जल का अर्पण। आचमन = शुद्धि; पाद्य = चरण प्रक्षालन; अर्घ्य = सम्मान। ऋग्वेद: 'जल कल्याणकारी है।' प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पण — कृतज्ञता। तांबे के पात्र से 'इदं पाद्यं समर्पयामि' बोलते हुए।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में जल अर्पण का महत्व ऋग्वेद और धर्म सिंधु में वर्णित है:

1पंचतत्व में जल

जल पाँच तत्वों में से एक है। पूजा में जल अर्पण — ब्रह्मांड के जल तत्व का देव को अर्पण।

2आचमन और अर्घ्य

  • आचमन = स्वयं को और देव को शुद्ध करना
  • पाद्य = देव के चरण प्रक्षालन के लिए जल
  • अर्घ्य = सम्मान में जल — अतिथि को जल देना भारतीय परंपरा

3सूर्य को अर्घ्य

प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पण — 'ॐ सूर्याय नमः' — वैदिक परंपरा। सूर्य जीवनदाता हैं — जल अर्पण कृतज्ञता है।

4जल = जीवन

ऋग्वेद: 'आपो हिष्ठा मयोभुवः' — जल कल्याणकारी है। जल के बिना जीवन नहीं — देव को जल अर्पण सर्वोच्च अर्पण।

5शुद्धि

जल से स्नान, जल से आचमन — शुद्धि का सबसे सरल माध्यम।

जल अर्पण की विधि

  1. 1तांबे के पात्र में जल
  2. 2दोनों हाथों से या दाएं हाथ से
  3. 3भगवान के चरणों में अर्पित करते हुए मंत्र बोलें:

> 'ॐ नमो भगवते... इदं पाद्यं/अर्घ्यं समर्पयामि'

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शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद — जल सूक्त, धर्म सिंधु — अर्घ्य विधि, विष्णु पुराण
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