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पूजा रहस्य📜 धर्म सिंधु — संकल्प विधान, मनुस्मृति, नित्यकर्म पूजा प्रकाश1 मिनट पठन

पूजा में संकल्प क्यों लिया जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

संकल्प क्यों: मन-वचन-कर्म का एकीकरण — 'मैं यह पूजा इस उद्देश्य के लिए।' ब्रह्मांड को साक्षी बनाना। फल का निर्धारण। संकल्प के बिना पूजा लक्ष्यहीन। सरल विकल्प: 'मैं श्री [देव नाम] की पूजा करता हूँ' — हिंदी में भी पर्याप्त।

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विस्तृत उत्तर

संकल्प का महत्व धर्म सिंधु और मनुस्मृति में वर्णित है:

1संकल्प = इरादा और समर्पण

संकल्प का अर्थ है — 'मैं यह पूजा इस उद्देश्य के लिए कर रहा हूँ।' यह मन, वचन और कर्म का एकीकरण है।

2ब्रह्मांडीय साक्षी

संकल्प में तिथि, वार, मास, स्थान बोला जाता है — यह ब्रह्मांड को साक्षी बनाना है।

3फल का निर्धारण

धर्म सिंधु: संकल्प से पूजा का फल निर्धारित होता है। संकल्प के बिना पूजा — लक्ष्यहीन।

4संकल्प का स्वरूप

> 'ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः। श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य... अद्य [तिथि] [वार] [मास]... [देव नाम] प्रीत्यर्थं [पूजा नाम] करिष्ये।'

5मन की तैयारी

संकल्प लेने से मन पूजा के लिए तैयार और केंद्रित हो जाता है।

6यदि पूर्ण संकल्प न आए

सरल हिंदी में बोलें — 'मैं श्री [देव नाम] की पूजा करता/करती हूँ।' — यह पर्याप्त है।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु — संकल्प विधान, मनुस्मृति, नित्यकर्म पूजा प्रकाश
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