विस्तृत उत्तर
संकल्प का महत्व धर्म सिंधु और मनुस्मृति में वर्णित है:
1संकल्प = इरादा और समर्पण
संकल्प का अर्थ है — 'मैं यह पूजा इस उद्देश्य के लिए कर रहा हूँ।' यह मन, वचन और कर्म का एकीकरण है।
2ब्रह्मांडीय साक्षी
संकल्प में तिथि, वार, मास, स्थान बोला जाता है — यह ब्रह्मांड को साक्षी बनाना है।
3फल का निर्धारण
धर्म सिंधु: संकल्प से पूजा का फल निर्धारित होता है। संकल्प के बिना पूजा — लक्ष्यहीन।
4संकल्प का स्वरूप
> 'ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः। श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य... अद्य [तिथि] [वार] [मास]... [देव नाम] प्रीत्यर्थं [पूजा नाम] करिष्ये।'
5मन की तैयारी
संकल्प लेने से मन पूजा के लिए तैयार और केंद्रित हो जाता है।
6यदि पूर्ण संकल्प न आए
सरल हिंदी में बोलें — 'मैं श्री [देव नाम] की पूजा करता/करती हूँ।' — यह पर्याप्त है।





