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पूजा रहस्य📜 मनुस्मृति — जप महात्म्य, भगवद् गीता (10.25), योग वशिष्ठ1 मिनट पठन

पूजा के दौरान मंत्र जप क्यों करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

मंत्र जप क्यों: गीता 10.25 — 'यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ।' मनुस्मृति: 'जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ।' जप से मन एकाग्र, मस्तिष्क सक्रिय, पाप नाश और रक्षा। तीन प्रकार: वाचिक < उपांशु (10x) < मानस (100x)। मानस जप सर्वश्रेष्ठ।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप का महत्व मनुस्मृति और भगवद् गीता में वर्णित है:

भगवद् गीता (10.25)

श्रीकृष्ण कहते हैं — 'यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि' — यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ। जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है।

मनुस्मृति

जपो यज्ञः श्रेष्ठतमः' — जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है।

जप के लाभ

  1. 1मन की एकाग्रता — एक मंत्र पर ध्यान लगाने से मन शांत
  2. 2ध्वनि कंपन — संस्कृत मंत्रों की विशेष frequency से मस्तिष्क सक्रिय
  3. 3संस्कार — नित्य जप से मन में देव का स्वरूप बैठता है
  4. 4पाप क्षय — मंत्र जप से पापों का नाश
  5. 5रक्षा — मंत्र कवच की तरह रक्षा करता है

जप के प्रकार

  1. 1वाचिक — मुख से बोलकर (प्रारंभिक साधक)
  2. 2उपांशु — होंठ हिलाकर, ध्वनि न निकले (मध्यम)
  3. 3मानस — मन में (श्रेष्ठ)

मनुस्मृति

वाचिकाद् दशगुणं श्रेष्ठमुपांशु स्यात् प्रकीर्तितम्। उपांशोश्च शतगुणं मानसं जपमुत्तमम्।

— वाचिक से 10 गुणा उपांशु, उपांशु से 100 गुणा मानस जप श्रेष्ठ।

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शास्त्रीय स्रोत
मनुस्मृति — जप महात्म्य, भगवद् गीता (10.25), योग वशिष्ठ
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