विस्तृत उत्तर
मंत्र जप का महत्व मनुस्मृति और भगवद् गीता में वर्णित है:
भगवद् गीता (10.25)
श्रीकृष्ण कहते हैं — 'यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि' — यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ। जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है।
मनुस्मृति
जपो यज्ञः श्रेष्ठतमः' — जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है।
जप के लाभ
- 1मन की एकाग्रता — एक मंत्र पर ध्यान लगाने से मन शांत
- 2ध्वनि कंपन — संस्कृत मंत्रों की विशेष frequency से मस्तिष्क सक्रिय
- 3संस्कार — नित्य जप से मन में देव का स्वरूप बैठता है
- 4पाप क्षय — मंत्र जप से पापों का नाश
- 5रक्षा — मंत्र कवच की तरह रक्षा करता है
जप के प्रकार
- 1वाचिक — मुख से बोलकर (प्रारंभिक साधक)
- 2उपांशु — होंठ हिलाकर, ध्वनि न निकले (मध्यम)
- 3मानस — मन में (श्रेष्ठ)
मनुस्मृति
वाचिकाद् दशगुणं श्रेष्ठमुपांशु स्यात् प्रकीर्तितम्। उपांशोश्च शतगुणं मानसं जपमुत्तमम्।
— वाचिक से 10 गुणा उपांशु, उपांशु से 100 गुणा मानस जप श्रेष्ठ।





