विस्तृत उत्तर
अमावस्या और काली पूजा के संबंध का वर्णन कालिका पुराण और महानिर्वाण तंत्र में मिलता है:
1काली और रात्रि — शास्त्रीय संबंध
काली 'महारात्रि' हैं — वे रात्रि की देवी हैं। अमावस्या की रात सर्वाधिक अंधेरी होती है — यह काली की शक्ति की अभिव्यक्ति है। जहाँ सूर्य और चंद्र की रोशनी नहीं, वहाँ काली का साम्राज्य है।
2ज्योतिषीय कारण
अमावस्या को सूर्य और चंद्र एक ही राशि में होते हैं — उनकी संयुक्त ऊर्जा पृथ्वी पर विशेष प्रभाव डालती है। यह काल आध्यात्मिक शक्तियों के लिए सक्रिय माना जाता है।
3तांत्रिक दृष्टिकोण
महानिर्वाण तंत्र में कहा गया है — अमावस्या की रात्रि को आकाश में कोई ज्योति नहीं होती — यह पूर्ण तमस का काल है। काली 'तमोगुणी' शक्ति हैं — तमस को नष्ट करने के लिए तमस के भीतर जाना पड़ता है। यह विरोधाभासी किंतु गहरा तांत्रिक सत्य है।
4पितृ पूजा का संबंध
अमावस्या पितरों का दिन भी है। काली मृत्यु और काल की देवी हैं — इस दिन मृत्यु और जीवन की शक्तियाँ सर्वाधिक सक्रिय होती हैं।
5दीपावली और काली
दीपावली कार्तिक अमावस्या को है। बंगाली परंपरा में इस दिन काली की महापूजा होती है — अंधकार में काली का पूजन और फिर दीप प्रज्वलन — यह अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा है।
दार्शनिक अर्थ
काली अंधकार को नष्ट करने आती हैं — अमावस्या के अंधेरे में काली की साधना यह संदेश देती है कि जीवन के सबसे अंधेरे क्षणों में भी देवी शक्ति उपलब्ध है।





